सुन कर कविता
पढ़ कर कविता
देश प्रेम के भाव न जगे
तन मन में आग न लगे
वह कविता नहीं कहानी है
कविता वही जो भरती रवानी है
जो बुढ़ों में लाती जवानी है
जो सोए को जगाती है
जो देश प्रेम सुलगाती है
जो अंग अंग आग लगाती है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'