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जो अंग अंग आग लगाती है।

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुन कर कविता
        
                                                    
                            
पढ़ कर कविता
देश प्रेम के भाव न जगे
तन मन में आग न लगे
वह कविता नहीं कहानी है
कविता वही जो भरती रवानी है
जो बुढ़ों में लाती जवानी है
जो सोए को जगाती है
जो देश प्रेम सुलगाती है
जो अंग अंग आग लगाती है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
20 घंटे पहले
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