यह धरती जहां बुद्ध तप किए
यह धरती जहां से वे ज्ञान लिए
लेकर ज्ञान यहीं से जग को दिए
है धरती यही जहां गयासुर ने तप किया
करके तप उसने विष्णु को खुश किया
उसके दर्शन से मिले मोक्ष ऐसा वर मिला
विष्णु रखे उसके पीठ पर धर्मशिला
जहां मां सीता ने पिंडदान किया
राजा धर्मपाल ने किया
बोधगया का विकास
है जो आज बौद्ध की आस
विष्णु पद मंदिर है जहां
अहिल्याबाई आई जहां
राम,लक्ष्मण संग सीता आई जहां
है जैन,हिंदू,बौद्ध का संगम जहां
है यह पावन नगरी
फल्गु के कगरी
जिसे जाने दुनिया सगरी
आओ देखो ज्ञान की नगरी
आओ देखो प्यार की गगरी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'