आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गया ज्ञान की नगरी

                
                                                         
                            यह धरती जहां बुद्ध तप किए
                                                                 
                            
यह धरती जहां से वे ज्ञान लिए
लेकर ज्ञान यहीं से जग को दिए
है धरती यही जहां गयासुर ने तप किया
करके तप उसने विष्णु को खुश किया
उसके दर्शन से मिले मोक्ष ऐसा वर मिला
विष्णु रखे उसके पीठ पर धर्मशिला
जहां मां सीता ने पिंडदान किया
राजा धर्मपाल ने किया
बोधगया का विकास
है जो आज बौद्ध की आस
विष्णु पद मंदिर है जहां
अहिल्याबाई आई जहां
राम,लक्ष्मण संग सीता आई जहां
है जैन,हिंदू,बौद्ध का संगम जहां
है यह पावन नगरी
फल्गु के कगरी
जिसे जाने दुनिया सगरी
आओ देखो ज्ञान की नगरी
आओ देखो प्यार की गगरी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर