विज्ञापन

क्यों न बनें हम शेर दें शत्रुओं को ललकार?

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सूरज के उगते ही भागता अंधकार है
        
                                                    
                            
शेर के निकलते ही मचता हाहाकार है
क्यों न बनें हम सूरज दूर करें अंधकार
क्यों न बनें हम शेर दें शत्रुओं को ललकार?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjay

2 कविताएं

View Profile

Sooba Lal

520 कविताएं

View Profile