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बादलों की मनमानी

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात भर बरसा पानी
        
                                                    
                            
सुबह तक बरसा पानी
दिन भर बरसा पानी
इधर पानी
उधर पानी
चारो ओर पानी पानी
बादल!करो मत मनमानी
गरीबों की चूई पलानी
मंगरू की चूई छानी
बच्चे किए मनमानी
वे कागज की नाव बनाए
असली नाव से उनके नाव टकराए
बच्चे खिलखिलाए
बड़े तिलमिलाए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
6 घंटे पहले
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