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बादलों की मनमानी

                
                                                         
                            रात भर बरसा पानी
                                                                 
                            
सुबह तक बरसा पानी
दिन भर बरसा पानी
इधर पानी
उधर पानी
चारो ओर पानी पानी
बादल!करो मत मनमानी
गरीबों की चूई पलानी
मंगरू की चूई छानी
बच्चे किए मनमानी
वे कागज की नाव बनाए
असली नाव से उनके नाव टकराए
बच्चे खिलखिलाए
बड़े तिलमिलाए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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47 मिनट पहले

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