आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई,
इधर मुझे मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त
और सुमित्रानंदन पंत की याद आई;
थोड़ी ब्रज भाषा, थोड़ी खड़ी बोली,
थोड़ी बुंदेली की सुगंध आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
कुछ हरियाणवी, कुछ मारवाड़ी,
कुछ गढ़वाली और कुमाऊनी की लहर सी आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
ज़रा अवधी, ज़रा मागधी,
ज़रा मैथिली और भोजपुरी की महक सी आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
घाघरा और चोली, माथे पे बिंदी,
कुछ पायल और चूड़ी की खनक सी आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
गुजिया और मठरी, समोसे , कचौड़ी,
हलवा और पूरी की खुशबू सी आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
लौकी की बर्फी, बेसन के लड्डू,
गरमा गरम जलेबी मुँह में पानी लाई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
संत कबीर के दोहे, संत तुलसी के रामचरितमानस
और संत मीराबाई के भजन की ध्वनि सी आई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
बनारस की घाटी, हरिद्वार, ऋषिकेश ,
गंगा में होती हर पाप की धुलाई,
आज हिंदी दिवस है,
दे रहें हैं लोग अंग्रेज़ी में बधाई;
आज हिंदी दिवस है,
क्यूँ न हम दें हिंदी में बधाई,
आद हिंदी दिवस है, सभी देशवासियों को
बहुत बधाई हो बधाई।
- अनीता स्रीनिवासन कुमार
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