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खुदकुशी

Anita Dasani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तमाम उम्र महबूब के संग अपनी ख़ुशी भर लो
        
                                                    
                            
वरना बुढ़ापा नहीं चाहिए तो ख़ुदकुशी कर लो।

वक़्त की साज़िश से घबराना भी लाज़िम है,
जो भी करना है आज 'अदा' बाख़ुशी कर लो।

नफ़रतों की तो कोई इंतहा नहीं इस जहाँ में
मिले जो न ख़ुशी तो मन में नाख़ुशी भर लो।

ज़िन्दगी के रंज-ओ-ग़म से निकलकर ऐ 'अदा'
हँसी बाँट लो , हासिल दिल की ख़ुशी कर लो।
— अनिता दासानी 'अदा'
3 घंटे पहले
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