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खुदकुशी

                
                                                         
                            तमाम उम्र महबूब के संग अपनी ख़ुशी भर लो
                                                                 
                            
वरना बुढ़ापा नहीं चाहिए तो ख़ुदकुशी कर लो।

वक़्त की साज़िश से घबराना भी लाज़िम है,
जो भी करना है आज 'अदा' बाख़ुशी कर लो।

नफ़रतों की तो कोई इंतहा नहीं इस जहाँ में
मिले जो न ख़ुशी तो मन में नाख़ुशी भर लो।

ज़िन्दगी के रंज-ओ-ग़म से निकलकर ऐ 'अदा'
हँसी बाँट लो , हासिल दिल की ख़ुशी कर लो।
— अनिता दासानी 'अदा'
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2 घंटे पहले

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