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जेहन में ईल्म का हम आफताब रखते हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम कहां आज भी सही हिसाब रखते हैं
        
                                                    
                            
कांटे मुट्ठी में हाथ पर गुलाब रखते हैं
मेरी शराफत को सुनकर तो चले आए हो
हम सिर्फ तुम पर नीयत खराब रखते हैं
साबका मेरा रोज पड़ता है ऐसे लोगों से
बाहर गंगाजल अंदर शराब रखते हैं
जरा भी अंधेरों से डर हमें नहीं लगता
जेहन में ईल्म का हम आफताब रखते हैं
कथनी और करनी क्या एक आपकी होगी
आप दो पाँवों में भी जुदा जुराब रखते हैं
4 घंटे पहले
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