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अपने रंगों से हर तस्वीर बदल देते हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने रंगों से हर तस्वीर बदल देते हैं
        
                                                    
                            
हम कभी वक्त की तासीर बदल देते हैं
ऊब गए हैं जब भी खलवत में रहते हुए
जी में आता है तो तकदीर बदल देते हैं
दौर कोई भी हो आवाम कब आजाद रही
ये सियासतदां बस जंजीर बदल देते हैं
हम अहले जिंदगी में बेनजीर हो के रहे
लोग तो हर दौर में नज़ीर बदल लेते हैं
कारवां कारवां से मिला तो खेल हुआ
रहबर ऐसे में राहगीर बदल देते हैं
डायरी उनकी पढ़ने में लुत्फ भी आया
वो हरेक हर्फ़ में तहरीर बदल देते हैं
जंग हो या कि खेल उनसे जितना मुश्किल
वो तो हर चाल में शमशीर बदल लेते हैं
इश्क बदनाम हुआ, है बिना उसूलों के
हीर अब राँझे , रांझे हीर बदल देते हैं
3 घंटे पहले
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