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अपने रंगों से हर तस्वीर बदल देते हैं

                
                                                         
                            अपने रंगों से हर तस्वीर बदल देते हैं
                                                                 
                            
हम कभी वक्त की तासीर बदल देते हैं
ऊब गए हैं जब भी खलवत में रहते हुए
जी में आता है तो तकदीर बदल देते हैं
दौर कोई भी हो आवाम कब आजाद रही
ये सियासतदां बस जंजीर बदल देते हैं
हम अहले जिंदगी में बेनजीर हो के रहे
लोग तो हर दौर में नज़ीर बदल लेते हैं
कारवां कारवां से मिला तो खेल हुआ
रहबर ऐसे में राहगीर बदल देते हैं
डायरी उनकी पढ़ने में लुत्फ भी आया
वो हरेक हर्फ़ में तहरीर बदल देते हैं
जंग हो या कि खेल उनसे जितना मुश्किल
वो तो हर चाल में शमशीर बदल लेते हैं
इश्क बदनाम हुआ, है बिना उसूलों के
हीर अब राँझे , रांझे हीर बदल देते हैं
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एक घंटा पहले

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