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और भी चीजें कुछ अच्छी थीं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर बेताबी बहुत बुरी थी
        
                                                    
                            
कितनी नजरें झुकी हुई थीं
धुआं जहां से उठते दिखा
आग वहीं पर लगी हुई थी
हर धड़कन तूफान बनी थी
साँसें जैसे थमी थमी थीं
अपने मन के खलल थे सारे
कहीं तो कोई कमी नहीं थी
देखो अब तूफान थमा है
चीजें क्या पहले ऐसी थीं
हम खुद को पहचान न पाए
यूं जीने की होड़ लगी थी
जख्म मिले शायद भर पाएं
तब कोई दुनिया उजड़ी थी
दूर से मैं सब देख रहा था
कितनी वारदात हुई थी
फूल,समंदर,खुशबू, शबनम
और भी चीजें कुछ अच्छी थीं
एक घंटा पहले
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