क्या पता था जिंदगी में,
कोई तूफान आयेगा ।
मेरा मुझसे सब कुछ चुरा,
दर्द ये गम दे जायेगा।।
खिलखिलाती दुनियां मेरी,
हँसती गाती जान थी।
आहट आयी तत्परता से,
जागती वो निर्भयता से।।
देख यहां वहां हमसे पहले ।
सुरक्षा चक्र बनाती थी।।
क्या पता था बिना आहट,
शक्ल खामोशी की लिये।
दबे पांव बिल्ली की तरह,
चोरी छुपे तूफा कोई अायेगा।।
सुरक्षित रखे दिल के सींके में,
प्राण प्रिये के प्राण इस तरह ।
बिना मुझे भनक लगे मुझसे,
वो चोेंरी छुपे चुरा ले जायेगा।।
अब जीना तो एक बहाना है,
बच्चों का मन समझाना है।
हांथ में बँधी घड़ी की टिक टिक
सुन रहा, गिन रहा हूँ 1- 1 कर ।।
अब उस घड़ी का इंतजार है,
जहां जिंदगीं के आगे कुछ न हो।
सिर्फ अंधेरा हो,भोर के पहले,
चिराग जला दूँ ,उजाले से पहले।।
सूर्य की किरणें फैहरें इस जमीं पर,
बस खत्म हो यहीं से मेरा सफर।।
- अनिल सोनी
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