गुमसुम सा है दिल मेरा
कहूं तो कहूं क्या
ओ अनजानी राहों में
तन्हा है ये सफर
जुगनू की रोशनी में
मंजिल को पाने की
कैसे ढूंढू सही डगर
जाने कब सवेरा होगा
दूर ये अंधेरा होगा
ना किसी की पुकार है
ना किसी को इंतजार है
जाने कैसे कटेगा ये सफर
गुमसुम सा है दिल मेरा
कहूं हो तो कहूं क्या ।।