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ये कब हम ने सीख लिया

Amita Paul

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी हक़ीक़त ख़ुद से छुपाना ये कब हम ने सीख लिया
        
                                                    
                            
अपने ही सच को झुठलाना ये कब हम ने सीख लिया

हमें तो बहुत नाज़ था अपनी सच शफ़्फ़ाफ़ सदाक़त पर
इधर-उधर की बात बनाना ये कब हम ने सीख लिया

तुम कहते थे हँसकर मुझ से कि तुम सचमुच झूठे हो
इसी झूठ से जी बहलाना ये कब हम ने सीख लिया

मुझे जहां ने अच्छा समझा मुझे लगा यूँ ही होगा
परख के ख़ुद ना ख़ुद को बताना ये कब हम ने सीख लिया

मुझे बनाने वाले तू तो रग-रग से वाक़िफ़ है मेरी
तेरी निगहबानी को भुलाना ये कब हम ने सीख लिया

कहते हैं कि सोहबत-संगत ही किरदार बनाती है
हरदम हाज़िर तुम को न जाना ये कब हम ने सीख लिया

जो भी सीखा रब के बाहर या रब वो भुलवा दे तू
‘अंजुम’ फिर ना पड़े दोहराना ये कब हम ने सीख लिया

 
एक घंटा पहले
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