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किसी सहरा में बरसात हुई।

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनापन
        
                                                    
                            

फिर चुन लिया है मैंने तुम्हीं को अपना,
और एक बार फिर तुमने
किसी और को चुन लिया है।

ये दर्द मेरा अपना है,
और मुझे इसकी आदत है।
मगर डरता हूँ—कहीं
ये मेरा अपनापन किसी रोज़
तुम्हें न छू जाए।

क्योंकि तुम्हें दर्द देने की आदत है,
दर्द लेना तुम्हारे बस की बात नहीं।

बस, यही एक बात है
जो मैंने सबसे कही है,
लेकिन तुमसे अब तक नहीं कही।

जो तुम्हारे अपने हैं,
या जिनके लिए तुम अपने हो
दोनों के इस अपनेपन को
ज़रा टटोलना।

तुम भी रहोगे,
वो भी रहेंगे,
लेकिन ये अपनापन नहीं होगा।

मुझे जो तुमसे मिला है,
वही मेरी विरासत है,
वही मेरी धरोहर है।

ये अमूल्य धरोहर
मैं किसी भी मूल्य पर नहीं दूँगा
किसी को नहीं,
और तुम्हें तो बिल्कुल नहीं।

मैं जानता हूँ…
या मेरा दिल जानता है,
या फिर मेरा ख़ुदा जानता है।

रिश्तों में बिकना,
टूटना, बिखरना और सँवरना
सब चलता है,
और वो भी बड़ी शिद्दत और समर्पण से।

ये शिद्दत और समर्पण—
दोनों तुम्हारे ही दिए हुए हैं।

ये मुझमें कहीं थे,
मगर मैं इनसे अनभिज्ञ था।
तुम्हारा साथ जो मिला,
तो मेरी इनसे मुलाक़ात यूँ हुई,
मानो एक अरसे बाद
किसी सहरा में बरसात हुई।
-आचार्य अमित
4 घंटे पहले
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