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आजकल की दुनियां का दस्तूर यही है

Alok Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी का उसपे कोई भी अहसान नहीं है
        
                                                    
                            
ऐसा इस जहान में इंसान नहीं है

आजकल की दुनियां का दस्तूर यही है
कौन है कि यहाँ परेशान नहीं है

तोड़ा उसका रिश्ता यह कह लड़की वालों ने
खुद का उसका शहर में मकान नहीं है

समंदर में शहर के हम आके खो गये
भीड़ में अपनी कोई पहचान नहीं है

करने बैठोगे अगर तुम बात प्रेम की
राधा के बिना उसमें तनिक जान नहीं है

आलोक ऐसी जिंदगी को जी के क्या करें
दिल में अगर कोई भी अरमान नहीं है
-आलोक
13 घंटे पहले
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