किसी का उसपे कोई भी अहसान नहीं है
ऐसा इस जहान में इंसान नहीं है
आजकल की दुनियां का दस्तूर यही है
कौन है कि यहाँ परेशान नहीं है
तोड़ा उसका रिश्ता यह कह लड़की वालों ने
खुद का उसका शहर में मकान नहीं है
समंदर में शहर के हम आके खो गये
भीड़ में अपनी कोई पहचान नहीं है
करने बैठोगे अगर तुम बात प्रेम की
राधा के बिना उसमें तनिक जान नहीं है
आलोक ऐसी जिंदगी को जी के क्या करें
दिल में अगर कोई भी अरमान नहीं है
-आलोक
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