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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अधिक आयु का मूल्य नहि, कंचन में गुण जान।
        
                                                    
                            
शब्दों के गठजोड़ का, कहीं न होता मान।।1।।

वेश वसन से संत नहि, नहि कोई विद्वान।
दिखें काक पिक एक से, वाणी से पहिचान।।2।।

 -अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर। 
4 वर्ष पहले
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