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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बंधु
        
                                                    
                            

बंधु दिखें गाढ़े काम, या जो करता नेह।
जिमि बरगद की वायु जड़,पोषण करती देह।।1।।

लोकतंत्र

भ्रष्टाचार दिन दूना, मानवता का ह्रास।
समाज सेवा पास नहि,लोकतंत्र परिहास।।2।।

व्यर्थ

वर्षा वृथा समुद्र में, धनकहि देना दान।
दिन में दीपक वृथा जनु, तृप्तहि भोजन मान ।।3।।

-अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर,कानपुर ।
 
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4 वर्ष पहले
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