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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लक्ष्मी
        
                                                    
                            

चंदन निज कर से घिसे, माला गूंथे हाथ।
स्तुति लिखे जो निज कर से, लक्ष्मी रहती साथ।।1।।

महत्त्व

बूंद बूंद से घट भरे, शब्द शब्द से ज्ञान।
मात्र एक ही वोट से,सत्ता पाय सुजान ।।2।।

धन

मीत बंधु चाकर सभी, त्यागैं लख धनहीन।
धनहि देख सब हों निकट, धन ही श्रेष्ठ प्रवीन।।3।।

--अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर।

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4 वर्ष पहले
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