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नीति के दोहे

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            विश्वास होय कर्म में , साहस मन में होय।
        
                                                    
                            
ताहि सफलता जानिये, योजना राखि गोय।।

धीरे धीरे काम करूं ,धीरे सब कुछ होय।
धीरे धीरे कोयला , इक दिन हीरा होय।।

- अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर, कानपुर।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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