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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पड़ोस
        
                                                    
                            

पुण्य पीढ़ियों के जान , मिले सुन्दर पड़ोस।
कुछ हानि होय या कष्ट , कर लीजै संतोष।।

रिपु

रिपु कितना निर्बल होय , पर सदा होशियार।
अवसर पाय मच्छर भी , करता गहरी मार।।


कवि अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर


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7 वर्ष पहले
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