विज्ञापन

नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पड़ोस
        
                                                    
                            

पुण्य पीढ़ियों के जान , मिले सुन्दर पड़ोस।
कुछ हानि होय या कष्ट , कर लीजै संतोष।।

रिपु

रिपु कितना निर्बल होय , पर सदा होशियार।
अवसर पाय मच्छर भी , करता गहरी मार।।


कवि अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Jagdish Prasad

514 कविताएं

View Profile

Jeewan Singh

97 कविताएं

View Profile