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नीति के दोहे मुक्तक

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कवि
        
                                                    
                            

कवि की कविता जानिये , कलम बंधी न होय।
निष्पक्ष उसकी लेखनी , राष्ट्र हित में होय।।

साधु

खाते खाद्य अखाद्य , करते पापाचार।
त्यागहु ऐसे साधु को , मती करियो सत्कार।।

रिपोर्टर

रिपोर्टिंग महा दुष्कर , सबके बस की नाहि।
जनहित जिसका लक्ष्य नहि , वह रिपोर्टर नाहि।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।


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7 वर्ष पहले
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