'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में फर लो पानी
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के फिर ना आएं
आजादी के बाद से अब तक कवि प्रदीप की ये पंक्तियां गीतों का सिरमौर बनी हुई हैं। अपने समय में शब्दों की आकाशगंगा में अपनी चमक बिखेर र...और पढ़ें
4 फरवरी 1908 को हैदराबाद रियासत के अन्डोल गाँव में (अब जिला मेडक में) जन्मे मख़दूम मोहिउद्दीन ने हैदराबाद राज्य के निज़ाम के ख़िलाफ़ 1946-1947 के तेलंगाना विद्रोह में अपनी ग़ज़ल और शायरी से क्रांति जगाने का काम किया था। इस संघर्ष में मख़दूम ने ग़रीब कि...और पढ़ें
नागार्जुन की विपुल रचनात्मकता की जिन विशेषताओं पर ध्यान जाता है वह है उनकी दृष्टि का निर्माल्य और असहमति का सौंदर्य। उनकी कविताओं और उपन्यासों के वस्तु वैविध्य पर गौर करें तो हम देखते हैं कि नागार्जुन की रचनाऍं समाज, राजनीति, संस्कृति और व्यवस्था पर...और पढ़ें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जब यह कहते हैं कि ‘मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे मेहबूब न मांग’ तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि वह शख़्स कौन है, जो अपनी महबूबा को अपनी मजबूरी बताते हुए कह रहा है,
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजै
अब भी दिलकश...और पढ़ें
आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि है। उनका जन्म बिहार के बेगूसराय के सिमरिया गांव में 23 सितंबर 1908 में हुआ था। बचपन में इनके पिता का देहांत हो गया था। बचपन बहुत कठिनाई और अभाव में बीता परंतु संघर्ष और अध्ययन के बल पर दिनकर ने ज्ञान और म...और पढ़ें
‘कुछ और भी तो हो इन इशारात के सिवा
यह सब तो ए निगाहें करम बात बात बात
इक उमर कट गई है, तेरे इंतजार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिनसे एक रात
अजीबतरीन तो इतना है कि
दिल ही में कोई रह-रह के झिझक उठता है
सुनते...और पढ़ें
नाकामियों के खौफ ने दीवाना कर दिया,
मंजिल के सामने भी पहूँच के निराश हूँ।
ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं।
आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है ...और पढ़ें
उर्दू शायरी ने वह दौर भी देखा है जब शायर इश्क़ की दुनियां में सपनों के राजकुमार की सी हैसियत रखते थे। नौजवान लड़कियां शायरों के चित्र अपने सिरहाने रखती थीं और दीवान अपने सीने से लगाए फिरती थीं। शायरी का यह दौर लाने वालों में सबसे पहला और प्रमुख नाम अ...और पढ़ें
योगेंद्र वर्मा व्योम उन रचनाकारों में से हैं जिन्होंने कविता से अपना साहित्यिक सफ़र शुरू किया और फिर नवगीत के आकर्षण में बंध कर नवगीत की तरफ आ गए। नवगीत की तरफ वो रचनाकार ही आता है जिसे बेड़ियां तोड़ने की ख्वाहिश होती है, जो बंधे-बंधाए और कहे-कहाए लह...और पढ़ें
प्रस्तुत है हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि और लेखक 'कुंवर नारायण' की काव्य चेतना पर अभिषेक शर्मा का लेख-
कुंवर नारायण का काव्य मनुष्य और समाज के बीच रागात्मक संबंध के प्रसार का काव्य है। निस्संदेह प्रेम ही वह तत्व है जो मनुष्य को मन...और पढ़ें