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मैं इनका मुरीद

2 Followers 156 Poems

गंगा-जमुनी तहजीब से लोगों का परिचय करवाते हैं कवि प्रदीप के गीत... 

रत्नेश मिश्र

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में फर लो पानी
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के फिर ना आएं  

आजादी के बाद से  अब तक कवि प्रदीप की ये पंक्तियां गीतों का सिरमौर बनी हुई हैं। अपने समय में शब्दों की आकाशगंगा में अपनी चमक बिखेर र...और पढ़ें
6 months ago

Makhdoom Mohiuddin: मख़दूम ने फरमाया कि प्रेम और युद्ध की कविता अलग-अलग नहीं होती

रत्नेश मिश्र

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    4 फरवरी 1908 को हैदराबाद रियासत के अन्डोल गाँव में (अब जिला मेडक में) जन्मे मख़दूम मोहिउद्दीन ने हैदराबाद राज्य के निज़ाम के ख़िलाफ़ 1946-1947 के तेलंगाना विद्रोह में अपनी ग़ज़ल और शायरी से क्रांति जगाने का काम किया था। इस संघर्ष में मख़दूम ने ग़रीब कि...और पढ़ें
                                                
6 months ago
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नागार्जुन: सहमतियों का गान नहीं, असहमतियों की साखी रचने वाला कवि 

डॉ. ओम निश्चल

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    नागार्जुन की विपुल रचनात्मकता की जिन विशेषताओं पर ध्यान जाता है वह है उनकी दृष्टि का निर्माल्य और असहमति का सौंदर्य। उनकी कविताओं और उपन्यासों के वस्तु वैविध्य पर गौर करें तो हम देखते हैं कि नागार्जुन की रचनाऍं समाज, राजनीति, संस्कृति और व्यवस्था पर...और पढ़ें
                                                
7 months ago

रवायत के प्रति रुमान तो इतना कि ग़ालिब और दाग़ के मिसरे भी फ़ैज के यहां मिलते हैं...

राकेश मिश्र

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ जब यह कहते हैं कि ‘मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरे मेहबूब न मांग’ तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि वह शख़्स कौन है, जो अपनी महबूबा को अपनी मजबूरी बताते हुए कह रहा है,
 
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजै
अब भी दिलकश...और पढ़ें
9 months ago
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दिनकर के यहां संवेदना के आँसू हैं पर निराशा का विलाप नहीं

अनुराग अनंत

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि है। उनका जन्म बिहार के बेगूसराय के सिमरिया गांव में 23 सितंबर 1908 में हुआ था। बचपन में इनके पिता का देहांत हो गया था। बचपन बहुत कठिनाई और अभाव में बीता परंतु संघर्ष और अध्ययन के बल पर दिनकर ने ज्ञान और म...और पढ़ें
                                                
10 months ago

किस्सा मजेदार : जब फ़िराक़ गोरखपुरी के इस जवाब पर हरिशंकर परसाई हो गए थे नर्वस

राकेश मिश्र

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    ‘कुछ और भी तो हो इन इशारात के सिवा
यह सब तो ए निगाहें करम बात बात बात 
इक उमर कट गई है, तेरे इंतजार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिनसे एक रात
अजीबतरीन तो इतना है कि 
दिल ही में कोई रह-रह के झिझक उठता है 
सुनते...और पढ़ें
11 months ago

राजकपूर साहब की पहली फ़िल्म 'आग' का मशहूर गीत 'ज़िंदा हूँ...लिखने वाले शायर की शायरी

Ratnesh Kumar Mishra

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    नाकामियों के खौफ ने दीवाना कर दिया,
मंजिल के सामने भी पहूँच के निराश हूँ।

ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं 
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं। 

आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है ...और पढ़ें
1 year ago

मजाज़ लखनवी: 'मजाज़ की किताब को लड़कियां तकिए में छिपा कर रखतीं थीं'

राकेश मिश्र

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    उर्दू शायरी ने वह दौर भी देखा है जब शायर इश्क़ की दुनियां में सपनों के राजकुमार की सी हैसियत रखते थे। नौजवान लड़कियां शायरों के चित्र अपने सिरहाने रखती थीं और दीवान अपने सीने से लगाए फिरती थीं। शायरी का यह दौर लाने वालों में सबसे पहला और प्रमुख नाम अ...और पढ़ें
                                                
1 year ago

योगेंद्र वर्मा 'व्योम' : बिखरते रिश्तों को सम्भालता एक गीतकार

ज़िया ज़मीर

Main Inka Mureed
                                                                
                                                    योगेंद्र वर्मा व्योम उन रचनाकारों में से हैं जिन्होंने कविता से अपना साहित्यिक सफ़र शुरू किया और फिर नवगीत के आकर्षण में बंध कर नवगीत की तरफ आ गए। नवगीत की तरफ वो रचनाकार ही आता है जिसे बेड़ियां तोड़ने की ख्वाहिश होती है, जो बंधे-बंधाए और कहे-कहाए लह...और पढ़ें
                                                
1 year ago

Kunwar Narayan: दुनिया में भाषाएं भले अनेक हों किंतु प्यार की तो एक ही भाषा है

डाॅ अभिषेक शर्मा

Main Inka Mureed
                                                                
                                                     प्रस्तुत है हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि और लेखक 'कुंवर नारायण' की काव्य चेतना पर अभिषेक शर्मा का लेख- 

कुंवर नारायण का काव्य मनुष्य और समाज के बीच रागात्मक संबंध के प्रसार का काव्य है। निस्संदेह प्रेम ही वह तत्व है जो मनुष्य को मन...और पढ़ें
1 year ago
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Ankit Kahar

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