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आज के टॉप 4 शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनी
मदद मिले न मिले आबरू तो जाती है
- वसीम बरेलवी

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इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूं गिला फिर हमें हवा से रहे
- जावेद अख़्तर

सुर्ख़-रू होता है इंसां ठोकरें खाने के बाद
रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बाद
- सय्यद मोहम्मद मस्त कलकत्तवी

क्या कहूं उस से कि जो बात समझता ही नहीं
वो तो मिलने को मुलाक़ात समझता ही नहीं
- फ़ातिमा हसन

6 वर्ष पहले
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