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आज के टॉप 4 शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी माँ सजदे में रहती है
- मुनव्वर राना

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दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ 
घर किसे कहते हैं क्या चीज़ है बे-घर होना 
~सलीम अहमद

पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था
जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा
- कैफ़ी आज़मी 

ये हुनर भी बड़ा ज़रूरी है
कितना झुक कर किसे सलाम करो
- हफ़ीज़ मेरठी
7 वर्ष पहले
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