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'सादगी' पर शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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                                                  बिना किसी प्रकार के आडंबर के भोलेपन के साथ रहने वाला व्यक्ति सादा है और उसके सभी कार्य सादगी का उदाहरण होते हैं। इसी सादगी पर शायरों ने जो कहा कि वह पेश है


अल्लाह-रे सादगी नहीं इतनी उन्हें ख़बर
मय्यत पे आ के पूछते हैं इन को क्या हुआ
- अमीर मीनाई


बज़ाहिर सादगी से मुस्कुरा कर देखने वालो
कोई कम-बख़्त ना-वाक़िफ़ अगर दीवाना हो जाए
- हफ़ीज़ जालंधरी
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ख़ूब आराइशें भी हैं लेकिन
सादगी सादगी है क्या कहिए
- ताज अहमद ताज


वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
- हसरत मोहानी

बनावट हो तो ऐसी हो कि जिस से सादगी टपके
ज़ियादा हो तो असली हुस्न छुप जाता है ज़ेवर से
- सफ़ी लखनवी


पूछते हैं ये शाएरी क्या है
हाए ऐसी भी सादगी क्या है
- ख़ालिद इक़बाल ताइब

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
- मिर्ज़ा ग़ालिब


वो सादगी में भी है अजब दिलकशी लिए
इस वास्ते हम उस की तमन्ना में जी लिए
- जुनैद हज़ीं लारी

तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
तुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
- असर लखनवी


यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए
बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया
- फ़ानी बदायुनी

7 वर्ष पहले
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