बिना किसी प्रकार के आडंबर के भोलेपन के साथ रहने वाला व्यक्ति सादा है और उसके सभी कार्य सादगी का उदाहरण होते हैं। इसी सादगी पर शायरों ने जो कहा कि वह पेश है
अल्लाह-रे सादगी नहीं इतनी उन्हें ख़बर
मय्यत पे आ के पूछते हैं इन को क्या हुआ
- अमीर मीनाई
बज़ाहिर सादगी से मुस्कुरा कर देखने वालो
कोई कम-बख़्त ना-वाक़िफ़ अगर दीवाना हो जाए
- हफ़ीज़ जालंधरी
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