एक सुराख़ सा कश्ती में हुआ चाहता है
सब असासा मिरा पानी में बहा चाहता है
- शकील आज़मी
काग़ज़ी कश्ती की आमद का इशारा मिल गया
डूबने वाले को तिनके का सहारा मिल गया
- नासिरा ज़ुबेरी
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अगरचे पार काग़ज़ की कभी कश्ती नहीं जाती
मगर अपनी ये मजबूरी कि ख़ुश-फ़हमी नहीं जाती
- इक़बाल नवेद
जब भी कश्ती के मुक़ाबिल भंवर आता है कोई
जगमगाता सर-ए-साहिल नज़र आता है कोई
- शहाब सफ़दर
मैं ही कश्ती भी हूं मल्लाह भी तूफ़ान भी हूं
और अब डूब रहा हूं तो परेशान भी हूं
- शकील ग्वालियरी
कोई कश्ती में तन्हा जा रहा है
किसी के साथ दरिया जा रहा है
- मोहसिन ज़ैदी
कटी है उम्र किसी आबदोज़ कश्ती में
सफ़र तमाम हुआ और कुछ नहीं देखा
- इफ़्तिख़ार नसीम
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूं
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
- तहज़ीब हाफ़ी
वो कश्ती से देते थे मंज़र की दाद
सो हम ने भी घर को सफ़ीना किया
- अबुल हसनात हक़्क़ी
तूफ़ां से बच के डूबी है कश्ती कहां न पूछ
साहिल भी ए'तिबार के क़ाबिल नहीं रहा
- मतीन नियाज़ी