विज्ञापन

'कश्ती' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  एक सुराख़ सा कश्ती में हुआ चाहता है
सब असासा मिरा पानी में बहा चाहता है
- शकील आज़मी


काग़ज़ी कश्ती की आमद का इशारा मिल गया
डूबने वाले को तिनके का सहारा मिल गया
नासिरा ज़ुबेरी
 
विज्ञापन

अगरचे पार काग़ज़ की कभी कश्ती नहीं जाती
मगर अपनी ये मजबूरी कि ख़ुश-फ़हमी नहीं जाती
- इक़बाल नवेद


जब भी कश्ती के मुक़ाबिल भंवर आता है कोई
जगमगाता सर-ए-साहिल नज़र आता है कोई
- शहाब सफ़दर

मैं ही कश्ती भी हूं मल्लाह भी तूफ़ान भी हूं
और अब डूब रहा हूं तो परेशान भी हूं
- शकील ग्वालियरी


कोई कश्ती में तन्हा जा रहा है
किसी के साथ दरिया जा रहा है
- मोहसिन ज़ैदी

कटी है उम्र किसी आबदोज़ कश्ती में
सफ़र तमाम हुआ और कुछ नहीं देखा
- इफ़्तिख़ार नसीम


मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूं
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
- तहज़ीब हाफ़ी

वो कश्ती से देते थे मंज़र की दाद
सो हम ने भी घर को सफ़ीना किया
- अबुल हसनात हक़्क़ी


तूफ़ां से बच के डूबी है कश्ती कहां न पूछ
साहिल भी ए'तिबार के क़ाबिल नहीं रहा
- मतीन नियाज़ी

5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8651 कविताएं

View Profile

SATYENDRA KUMAR

112 कविताएं

View Profile