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आज़ादी को बयां करते हुए टॉप 10 कोट्स

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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स्वतंत्रता चाहें रूढ़ियों से हो या व्यवस्था या किसी औपनिवेशिक सरकार से, वह इतनी आसानी से नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। इन्हीं संघर्षों के बीच कई बार मन हतोत्साहित भी हो जाता है, ऐसे में कुछ शब्द इतना कमाल कर जाते हैं कि वापस उत्साह का संचार हो जाता है और उन्हीं शब्दों को हम नारा बना लेते है।

आपके सामने पेश हैं ऐसे ही कुछ नारे जिन्होंने आज़ादी के संघर्ष के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों में साहस का संचार किया और वह आज़ादी की पहचान बन गए।

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सुभाष चन्द्र बोस

Subhash Chandra Bose

जय हिन्द 

बाल गंगाधर तिलक

बाल गंगाधर तिलक

स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा

बिस्मिल अज़ीमाबादी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

पंडित मदन मोहन मालवीय

मदन मोहन मालवीय

सत्यमेव जयते

बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय

बंकिम चंद्र चटर्जी

वन्दे मातरम

जवाहर लाल नेहरू

आराम हराम है

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी

अंग्रेजो भारत छोड़ो

भगत सिंह

इंक़लाब ज़िंदाबाद

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी

करो या मरो

चन्द्र शेखर आज़ाद

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे आज़ाद ही रहे हैं आज़ाद ही रहेंगे
8 वर्ष पहले
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