बारिश से मन का रिश्ता बहुत गहरा है, मन का मौसमी बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। लेकिन कहीं मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति तो कहीं सूखे की। पाठकों के लिए पेश है 'बारिश' पर लिखे शायरों के अल्फाज़-
कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गए
वर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था
- अख़्तर होशियारपुरी
अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
- बशीर बद्र
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वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था
पानी पानी कहते कहते डूब गया है
- आनिस मुईन
अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशाँ होना ही था
- मोहसिन नक़वी
कुछ भी दरिया ने मदद अपने पड़ोसी की न की
दूर तक पानी ही पानी था मगर साहिल जला
- फ़रहत एहसास
कच्ची दीवारों को पानी की लहर काट गई
पहली बारिश ही ने बरसात की ढाया है मुझे
- ज़ुबैर रिज़वी
अंदर अंदर खोखले हो जाते हैं घर
जब दीवारों में पानी भर जाता है
- ज़ेब ग़ौरी
कल बहा लूँगी तुझे तोड़ के साहिल की क़ुयूद
और फिर गुम्बद ओ मीनार भी पानी पानी
- अख़्तर-उल-ईमान
अगर ऐ नाख़ुदा तूफ़ान से लड़ने का दम-ख़म है
इधर कश्ती न ले आना यहाँ पानी बहुत कम है
- दिवाकर राही
वो मजबूरी मौत है जिस में कासे को बुनियाद मिले
प्यास की शिद्दत जब बढ़ती है डर लगता है पानी से
-अज्ञात