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होली 2019 : दोस्तों को संदेश में भेजें ये खास शायरी

गौरव द्विवेदी

Kavya Charcha
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होली का त्यौहार आता है तो फ़िज़ाओं में गुलाल और अबीर के साथ प्रेम का रंग भी घुल जाता है और जहाँ प्रेम की बात हो वहाँ शेर-ओ-शायरी का होनी भी लाजमी है। पढ़ें कुछ ऐसे ही मुहब्बत भरे शेर जो इस त्यौहार के लिए ख़ास कहे गए हैं।

मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के 
हमसे तुम कुछ मांगने आओ बहाने फाग के
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी 

मुंह पर नकाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
- माधव राम जौहर

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मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली 
उठो यारों भरो रंगों से झोली
- शैख़ हातिम

जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की
और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की 
- नज़ीर अकबराबादी

बाज़ार, गली और कूचों में ग़ुल शोर मचाया होली ने
दिल शाद किया और मोह लिया ये जौबन पाया होली ने
- नज़ीर अकबराबादी

फ़स्ल-ए-बहार आई है होली के रूप में
सोलह सिंगार लाई है होली के रूप में
- साग़र निज़ामी

कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदा से प्रेम करो दिल से प्यार होली में
- नज़ीर बनारसी

अज़ कबीर-ओ-रंग-ए-केसर और गुलाल 
अब्र छाया है सफ़ेद-ओ-ज़र्द-ओ-लाल 
- फ़ाएज़ देहलवी

ले के आई है अजब मस्त अदाएँ होली 
मुल्क में आज नए रुख़ से दिखाएँ होली
- कँवल डिबाइवी

गले मुझ को लगा लो ऐ मिरे दिलदार होली में 
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में 
- भारतेंदु हरिश्चंद्र

हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है 
तीर-ए-नज़र चलाइए होली का रोज़ है 
- जूलियस नहीफ़ देहलवी

कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग 
कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग 
- अज़हर इक़बाल

चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे 
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का 
- अज़हर इक़बाल

माथे पे हुस्न-ख़ेज़ है जल्वा गुलाल का 
बिंदी से औज पर है सितारा जमाल का 
- उफ़ुक़ लखनवी

अगर आज भी बोली-ठोली न होगी 
तो होली ठिकाने की होली न होगी 
- नज़ीर बनारसी

बड़ी गालियाँ देगा फागुन का मौसम 
अगर आज ठट्ठा ठिठोली न होगी 
- नज़ीर बनारसी

है होली का दिन कम से कम दोपहर तक 
किसी के ठिकाने की बोली न होगी 
- नज़ीर बनारसी


पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल
जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं
- नादिर लखनवी

बहार आई कि दिन होली के आए
गुलों में रंग खेला जा रहा है
- जलील मानिकपूरी

सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका
बिन होली खेले ही साजन भीग गया
- मुसव्विर सब्ज़वारी

7 वर्ष पहले
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