होली का त्यौहार आता है तो फ़िज़ाओं में गुलाल और अबीर के साथ प्रेम का रंग भी घुल जाता है और जहाँ प्रेम की बात हो वहाँ शेर-ओ-शायरी का होनी भी लाजमी है। पढ़ें कुछ ऐसे ही मुहब्बत भरे शेर जो इस त्यौहार के लिए ख़ास कहे गए हैं।
मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हमसे तुम कुछ मांगने आओ बहाने फाग के
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
मुंह पर नकाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
- माधव राम जौहर
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