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दर्द भरे 10 चुनिंदा शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  मेरे दुख-दर्द का तुझ पर हो असर कुछ ऐसा
मैं रहूँ भूका तो तुझ से भी न खाया जाए
- गोपालदास नीरज

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ 
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया 
- साहिर लुधियानवी
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दर्द हो दिल में तो दवा कीजे 
और जो दिल ही न हो तो क्या कीजे 
- मंज़र लखनवी

हाल तुम सुन लो मिरा देख लो सूरत मेरी 
दर्द वो चीज़ नहीं है कि दिखाए कोई 
- जलील मानिकपूरी

एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी 
एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उभरने न दिया 
- आज़ाद गुलाटी

आओ दुख दर्द बाँट लें 'एजाज़'
रंज-ओ-ग़म को इधर-उधर कर लें
- ग़नी एजाज़

प्यास बुझाने आते हैं दुख दर्द परिंदे रात गए
ख़्वाब का चश्मा फूटा था आँखों में अब तक जारी है
- सिदरा सहर इमरान

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की 
आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की 
- अहमद फ़राज़

क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं 
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ 
- मिर्ज़ा ग़ालिब

मैं रोना चाहता हूँ ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं 
फिर उस के बाद गहरी नींद सोना चाहता हूँ मैं 
- फ़रहत एहसास
5 वर्ष पहले
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