विज्ञापन

'इश्क़ में मिले फरेब' पर कहे गए शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  तू भी सादा है कभी चाल बदलता ही नहीं 
हम भी सादा हैं इसी चाल में आ जाते हैं 
- अफ़ज़ल ख़ान

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे 
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ 
- फ़िराक़ गोरखपुरी

आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब 
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे 
- इक़बाल अज़ीम
विज्ञापन

मेरे ब'अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना 
गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा 
- क़तील शिफ़ाई

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी 
ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी 
- फ़िराक़ गोरखपुरी

तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए 
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए 
- फ़ना निज़ामी कानपुरी

इक सफ़र में कोई दो बार नहीं लुट सकता 
अब दोबारा तिरी चाहत नहीं की जा सकती 
- जमाल एहसानी

ज़ख़्म लगा कर उस का भी कुछ हाथ खुला 
मैं भी धोका खा कर कुछ चालाक हुआ 
- ज़ेब ग़ौरी

जिन की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिन के लिए बदनाम हुए 
आज वही हम से बेगाने बेगाने से रहते हैं 
- हबीब जालिब

समझा लिया फ़रेब से मुझ को तो आप ने 
दिल से तो पूछ लीजिए क्यूँ बे-क़रार है 
- लाला माधव राम जौहर

किस ने वफ़ा के नाम पे धोका दिया मुझे 
किस से कहूँ कि मेरा गुनहगार कौन है 
- नजीब अहमद

अक्सर ऐसा भी मोहब्बत में हुआ करता है 
कि समझ-बूझ के खा जाता है धोका कोई 
- मज़हर इमाम

दिखाई देता है जो कुछ कहीं वो ख़्वाब न हो 
जो सुन रही हूँ वो धोका न हो समाअत का 
- फ़ातिमा हसन

वो धोके पे धोका दिए जाए लेकिन
ये दिल फिर भी उस की सिफ़ारिश करे है
- फ़ारूक़ रहमान

सारे राज़ समझो लो लेकिन ख़ुद क्यूँ उन को लब पर लाओ
धोका देने वाला रो दे ऐसी शान से धोका खाओ
- अहमद नदीम क़ासमी

जो लोग अभी तक नाम वफ़ा का लेते हैं
वो जान के धोके खाते, धोके देते हैं
- इब्न-ए-इंशा

धोका था निगाहों का मगर ख़ूब था धोका
मुझ को तिरी नज़रों में मोहब्बत नज़र आई
-शौकत थानवी
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile