फिरते थे दश्त दश्त दिवाने किधर गए
वे आशिक़ी के हाए ज़माने किधर गए
- अज्ञात
दश्त गुलज़ार हुआ जाता है
क्या यहाँ अहल-ए-वफ़ा बैठे थे
- सफ़िया शमीम
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दश्त की ख़ाक भी छानी है
घर सी कहाँ वीरानी है
- विकास शर्मा राज़
कुछ दिनों दश्त भी आबाद हुआ चाहता है
कुछ दिनों के लिए अब शहर को वीरानी दे
- नदीम अहमद
ये एक अब्र का टुकड़ा कहाँ कहाँ बरसे
तमाम दश्त ही प्यासा दिखाई देता है
- शकेब जलाली
कब से बंजर थी नज़र ख़्वाब तो आया
शुक्र है दश्त में सैलाब तो आया
- ग़ुफ़रान अमजद
कोई तो दश्त समुंदर में ढल गया आख़िर
किसी के हिज्र में रो रो के भर गया था मैं
- अहमद ख़याल
प्यासे रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े
- इक़बाल साजिद
हम जुनूँ वाले हैं हम से कभी पूछो प्यारे
दश्त कहते हैं किसे दश्त की वहशत कैसी
- अज़ीज़ नबील
मेरी मंज़िल न कहीं थी तो मुझे
दश्त-दर-दश्त फिराया क्यूँ था
- मोहसिन ज़ैदी