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दश्त यानी जंगल पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

Dasht shayari collection
                
                                                         
                            

फिरते थे दश्त दश्त दिवाने किधर गए
वे आशिक़ी के हाए ज़माने किधर गए
- अज्ञात


दश्त गुलज़ार हुआ जाता है
क्या यहाँ अहल-ए-वफ़ा बैठे थे
- सफ़िया शमीम

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6 वर्ष पहले

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