कहा जाता है कि आंखें अमूमन दिल की बातें कर जाती हैं। कहावतों, कविताओं, शेरो-शायरी, गीतों-मुहाबरों सहित तमाम भाषाओं और लहजों में आंखों की खूबसूरती और भाषा को बयां करने की कोशिश की गई है।
कई बार ऐसा होता है कि जो बातें अनकही रह जाती हैं, लेकिन आंखों के रस्ते बयां होती रहती हैं। शायर या कवि चूंकि आंखों की भाषा को न केवल वखूबी समझने की कोशिश करते हैं बल्कि उसे पढ़ भी लेते हैं फिर उसे अपनी शायरी में ढाल लेते हैं।
आँखों में जो बात हो गई है
इक शरह-ए-हयात हो गई है
- फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत बेबाक आँखों में तअ'ल्लुक़ टिक नहीं पाता
मोहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है
- वसीम बरेलवी
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आँख रहज़न नहीं तो फिर क्या है
लूट लेती है क़ाफ़िला दिल का
- जलील मानिकपूरी
मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूं वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूं
एक जंगल है तेरी आंखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूं..
- दुष्यंत कुमार
अब तक मेरी यादों से मिटाए नहीं मिटता
भीगी हुई इक शाम का मंज़र तेरी आंखें
- मोहसिन नक़वी
उन आंखों में डाल कर जब आंखें उस रात
मैं डूबा तो मिल गए डूबे हुए जहाज़
- अमीक़ हनफ़ी
उन मद-भरी आंखों की तारीफ़ हो क्या ज़ाहिद
देखो तो हैं दो साग़र समझो तो हैं मय-ख़ाना
- दुआ डबाईवी
एक आंसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुमने देखा नहीं आंखों का समुंदर होना
-मुनव्वर राणा
इक हसीं आँख के इशारे पर
क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं
- अब्दुल हमीद अदम
लड़ने को दिल जो चाहे तो आँखें लड़ाइए
हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो
- लाला माधव राम जौहर
जब तिरे नैन मुस्कुराते हैं
ज़ीस्त के रंज भूल जाते हैं
- अब्दुल हमीद अदम
आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे
क्यूँ खिड़कियों से झाँक रही है क़ज़ा मुझे
- इमदाद अली बहर