कहा जाता है कि आंखें अमूमन दिल की बातें कर जाती हैं। कहावतों, कविताओं, शेरो-शायरी, गीतों-मुहाबरों सहित तमाम भाषाओं और लहजों में आंखों की खूबसूरती और भाषा को बयां करने की कोशिश की गई है।
कई बार ऐसा होता है कि जो बातें अनकही रह जाती हैं, लेकिन आंखों के रस्ते बयां होती रहती हैं। शायर या कवि चूंकि आंखों की भाषा को न केवल वखूबी समझने की कोशिश करते हैं बल्कि उसे पढ़ भी लेते हैं फिर उसे अपनी शायरी में ढाल लेते हैं।
आँखों में जो बात हो गई है
इक शरह-ए-हयात हो गई है
- फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत बेबाक आँखों में तअ'ल्लुक़ टिक नहीं पाता
मोहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है
- वसीम बरेलवी
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