विज्ञापन

नवाज़ देवबंदी की मशहूर ग़ज़ल 'तेरे आने की जब ख़बर महके'

दीपाली अग्रवाल

Irshaad
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

तेरे आने की जब ख़बर महके


तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके

शाम महके तिरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके

रात भर सोचता रहा तुझ को
ज़ेहन-ओ-दिल मेरे रात भर महके

याद आए तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके

वो घड़ी-दो-घड़ी जहाँ बैठे
वो ज़मीं महके वो शजर महके
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

विजय कुमार

177 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13122 कविताएं

View Profile