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नवाज़ देवबंदी की मशहूर ग़ज़ल 'तेरे आने की जब ख़बर महके'

दीपाली अग्रवाल

Irshaad
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तेरे आने की जब ख़बर महके


तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके

शाम महके तिरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके

रात भर सोचता रहा तुझ को
ज़ेहन-ओ-दिल मेरे रात भर महके

याद आए तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके

वो घड़ी-दो-घड़ी जहाँ बैठे
वो ज़मीं महके वो शजर महके
7 वर्ष पहले
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