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नवाज़ देवबंदी की मशहूर ग़ज़ल 'तेरे आने की जब ख़बर महके'

Nawaz deobandi famous ghazal tere aane ki jab khabar mahke
                
                                                         
                            

तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके

शाम महके तिरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके

रात भर सोचता रहा तुझ को
ज़ेहन-ओ-दिल मेरे रात भर महके

याद आए तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके

वो घड़ी-दो-घड़ी जहाँ बैठे
वो ज़मीं महके वो शजर महके

7 वर्ष पहले

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