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जीवन दर्शन: 20 बेहतरीन शेर

रत्नेश मिश्र

Irshaad
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                                                  उस शख़्स के ग़म का कोई अंदाज़ा लगाए,
जिसको कभी रोते हुए देखा न किसी ने।
~वकील अख़्तर 

जैसा दर्द हो वैसा मंज़र होता है,
मौसम तो इंसान के अंदर होता है। 
~अज़ीज़ ऐजाज़ 

अज़ल तो मुफ़्त में बदनाम है ज़माने में,
कुछ उनसे पूछ, जिन्हें ज़िंदगी ने मारा है। 
~फ़ैज़ 
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तिरे चराग़ अलग हों, मिरे चराग़ अलग,
मगर उजाला तो फिर भी जुदा नहीं होता। 
~वसीम बरेलवी 

मैं अकेला ही चला था जानिबे-मंज़िल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। 
~मजरूह सुल्तानपुरी 

रगों में दौड़ने-फ़िरने के हम नहीं कायल,
जो आंख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है। 
~ग़ालिब 

हर चीज़ का खोना भी बड़ी दौलत है,
बेफिक्री से सोना भी बड़ी दौलत है। 
~अमजद हैदराबादी 

मिट्टी का जिस्म ले के चले हो तो सोच लो,
इस रास्ते में एक समंदर भी आएगा। 
~सलीम शाहिद 

ऐसी तारीकियां आंखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़। 
~अहमद फ़राज़

लम्हों के अज़ाब सह रहा हूं
मैं अपने वजूद की सज़ा हूं। 
~अतहर नफ़ीस  

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई
हम न सोए रात थक कर सो गई।
~राही मासूम रज़ा

कभी मेरी तलब कच्चे घड़े पर पार उतरती है
कभी महफ़ूज़ कश्ती में सफ़र करने से डरता हूं।
~फ़रीद परबती  

न मंज़िलों को न हम रहगुज़र को देखते हैं
अजब सफ़र है कि बस हम-सफ़र को देखते हैं। 
~अहमद फ़राज़

जहां चोट खाना, वहीं मुस्कुराना,
मगर इस अदा से कि रो दे जमाना। 
~वामिक जौनपुरी 

शोर यूं ही न परिंदों ने मचाया होगा,
कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा। 
~अज्ञात 

मेरी मुट्ठी में सुलगती रेत रख कर चल दिया,
कितनी आवाज़ें दिया करता था ये दरिया मुझे। 
~अज्ञात 

उसकी फ़ितरत में नहीं, रुक के कोई बात सुने,
वक्त आवाज़ है, आवाज़ को आवाज़ न दो। 
~अज्ञात 

दफ़नाना देखभाल के हसरत भरे की लाश,
लिपटी हुई कफ़न में कोई आरज़ू न हो। 
~अज्ञात 

हुस्न और इश्क़ के नैरंग खुदा ही जाने,
शमअ जलती है कि दिल जलता है परवाने का। 
~साकिब लखनवी 

इससे बढ़कर दोस्त कोई दूसरा होता नहीं,
सब जुदा हो जाएं, लेकिन ग़म जुदा होता नहीं। 
~जिगर मुरादाबादी 
 
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