शाहबाज़ ख़ान सिनेमा जगत का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने छोटे परदे के साथ-साथ बड़े परदे पर भी अपनी छाप छोड़ी है। इस बार वह जश्न-ए-अदब में शरीक होंगे और सिनेमा के बारे में बात करेंगे। वह बताएंगे कि किसी भी फ़िल्म या डॉक्यूमेंट्री का सामाजिक दायित्व क्या होना चाहिए साथ ही इतिहास का सिनेमा में क्या महत्व है। शाहबाज़ ख़ान मेंहदी, बादल, राजू चाचा, द हीरो आदि फ़िल्मों में नज़र आए थे। उनकी हालिया फ़िल्म है रिस्कनामा।
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हैदर ख़ान (शाहबाज़ ख़ान) का जन्म 10 मार्च 1966 को मध्य-प्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। उनके पिता पद्मभूषण उस्ताद आमिर ख़ान हैं और भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्वान हैं। हैदर कुछ साल नागपुर में काम करने के बाद मुंबई आ गए थे। जहां उन्होंने अपने फ़िल्मों में बतौर अभिनेता एक पहचान बनाई और आज लोग उन्हें शाहबाज़ ख़ान के नाम से जानते हैं। बेताल पचीसी और चंद्रकांता जैसे सीरियल ने उन्हें ख़्याति दी। भारतीय फ़िल्मों के साथ-साथ शाहबाज़ ने चाइना की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ‘डाइंग टू सर्वाइव’ में भी काम किया है।
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