राजेन्द्र मोहन भटनागर द्वारा लिखित उपन्यास 'अथ पद्मावती' चित्तौड़ की विश्व-विख्यात रानी पद्मावती का चित्रण करता है। इतिहास को लोक-साहित्य की शक्ल लेने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। चितौड़ की रानी पद्मावती की कथा कुछ ऐसी ही है। पद्मावती की कहानी इतिहास के पन्नों से निकलकर अब एक आख्यान या पुराण कथा बन चुकी है। इस उपन्यास में पद्मावती के बचपन से लेकर यौवन तक की अनुभूतियां बसी हैं। इतिहास के पन्नों में दबे हुए चरित्र जब लोकजीवन का हिस्सा बन जाएं, तो वह अमर हो जाते हैं। धीरे-धीरे ऐसे पात्र और चरित्र संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं। चित्तौड़ की रानी पद्मावती का चरित्र इसका अप्रतिम उदाहरण हैं। साहित्य संवेदनाओं का संस्कार है। साहित्य में सांस्कृतिक तत्व स्वतः समाहित हो जाते हैं।
विज्ञापन
इस रूप में साहित्य 'इतिहास का वर्तमान' होता है। साहित्य की दृष्टि से देखा जाए तो पद्मावती मानव जीवन की धरोहर सिद्ध होती हैं। प्रस्तुत उपन्यास पद्मावती को तलाशने की यात्रा है। इसको पढ़ते समय सहज और रोचक संवाद शैली के चलते पाठक भी कथानक से जुड़ता चला जाता है। ऐतिहासिक कथानकों को कहानी के शक्ल देना आसान नहीं होता। पद्मावती का चरित्र, साहित्य और लोकगाथाओं में मिलता है। सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने सन 1540 के आसपास अवधी भाषा में महाकाव्य ‘पद्मावत’ की रचना की। इस महाकाव्य की नायिका रानी पद्मावती हैं।
यह महाकाव्य प्रेम और विरह का अद्भुत आख्यान है। उपन्यास 'पद्मावती' इसी परंपरा की अगली कड़ी है। इस उपन्यास में कई पात्रों के माध्यम से पद्मावती की जीवन गाथा को दिखाया गया है। एक साधारण युवती, एक राजकुमारी और फिर एक रानी। उपन्यास पद्मावती की अनुभूतियों और संघर्षों का कथानक है। लेखक ने कथा का तानाबाना बुनते समय कई ऐतिहासिक किताबों का सहारा लिया है। प्राचीन सूफी कवि अमीर खुसरो से लगायत दशरथ शर्मा जैसे आधुनिक इतिहासकारों के ग्रंथों का संदर्भ लिया गया है। ये संदर्भ कथानक की प्राचीनता को बनाए रखते हैं। उपन्यास 'अथ पद्मावती' में प्रेम है, बलिदान है, साहस है। यह प्रेम की उन अनुभूतियों को पुनर्जीवित कर सका है, जिनको हम याद रखना चाहते हैं। इसकी लेखन शैली भी अत्यंत सुरुचिपूर्ण है।
अथ पद्मावती
लेखक- राजेन्द्र मोहन भटनागर
प्रकाशक- वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य- 395 रुपये