वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु का मार्गी होना नौकरी-व्यापार में बेहतर अवसर दिला सकता है। इस राशि के जातकों की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी हैं। गुरु का आपके कार्यक्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करने का योगदान रहेगा।
वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु का मार्गी होना नौकरी-व्यापार में बेहतर अवसर दिला सकता है। इस राशि के जातकों की कुंडली में देवगुरु बृहस्पति दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी हैं। गुरु का आपके कार्यक्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करने का योगदान रहेगा। आपको जीवन में आने वाली सभी तरह की बाधाएं दूर होंगी। गुरु का मार्गी होना आपके द्वारा बनाई गई योजनाओं में कामयाबी दिलाएगा। धन अर्जित करने के लिए कई मौके मिलेंगे। जिन लोगों का अपना खुद व्यापार है उनके लिए गुरु का मार्गी होना किसी वरदान से कम नहीं है। वहीं प्रेम जीवन जीने वाले जातकों के लिए गुरु का मार्गी होना आपको संतुष्ट दिला सकता है। सेहत संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।
गुरु इस दिन हुए मार्गी
देवगुरु बृहस्पति अब शुक्रदेव की राशि वृषभ राशि में सीधी चाल से चल रहे हैं यानी देवगुरु अब वक्री से मार्गी हो गए हैं। गुरु का मार्गी होना बहुत ही शुभ संकेत हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति की काफी अहम भूमिका होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का वक्री होने से मतलब उल्टी चाल और मार्गी होने का अर्थ सीधी चाल से होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है। यह बुद्धि, ज्ञान, भाग्य, संतान सुख, विवाह और जीव के कारक ग्रह होते हैं। देवगुरु वृहस्पति को धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है। यह कर्क राशि में उच्च के होते हैं।
जब भी किसी जातक की कुंडली में देवगुरु शुभ भाव में रहते हैं या फिर द्दष्टि डालते हैं तो उस व्यक्ति के जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि आती है और भाग्य का अच्छा साथ मिलता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक देवगुरु बहस्पति बीते 4 फरवरी 2025 को वृषभ राशि में वक्री से मार्गी हुए हैं। आपको बता दें यह 15 मई 2025 तक वृषभ राशि में मार्गी रहेंगे फिर मिथुन राशि में गोचर होंगे। इसके पहले गुरु 09 अक्तूबर 2024 को वृषभ राशि में वक्री हुए थे। गुरु के मार्गी होने से इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिलेगा।