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वीडियो कविता : कबीर दास

                
                                                         
                            हमन है इश्क मस्ताना हमन को होशियारी क्या ? 
                                                                 
                            
रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या ? 

जो बिछुड़े हैं पियारे से भटकते दर-ब-दर फिरते, 
हमारा यार है हम में हमन को इंतज़ारी क्या ? 

ख़लक़ सब नाम अपने को बहुत कर सिर पटकता है, 
हमन गुरनाम साँचा है हमन दुनिया से यारी क्या ? 

न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से, 
उन्हीं से नेह लागी है हमन को बेक़रारी क्या ? 

कबीरा इश्क़ का माता, दुई को दूर कर दिल से, 
जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ? 

- कबीर 

साभार - हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें, भारतीय ज्ञानपीठ
8 वर्ष पहले

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