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UNICEF India: मृत बच्चे को जन्म देकर टूट चुकी थीं ओडिशा की गोलापी, फिर लिया जीवन का सबसे सही फैसला

ओडिशा की गोलापी
                
                                                         
                            
UNICEF India : ग्रामीण भारत की महिलाएं घर परिवार संभालने, कभी कभार खेती का काम करने और पति व बच्चों की देखभाल में गुजार देती हैं। भारतीय ग्रामीण परिवेश की महिलाएं आज भी अपने फैसलों को लेकर परिवार पर निर्भर हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति उनकी सक्रियता कम होती है। जागरूकता की कमी के कारण वह अपने अधिकारों, बाहरी समाज, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी बातों से अंजान रहती हैं। हालांकि सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं कई सारी योजनाएं चला रही हैं, जो ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं। इन्हीं महिलाओं में से एक हैं ओडिशा की रहने वाली गोलापी। मृत बच्चे को जन्म देने वाली गोलापी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन उन्होंने अपने एक फैसले से समाज की हर महिला को प्रेरित किया। आइए जानते हैं ओडिशा की गोलापी की कहानी।

कौन हैं गोलापी

गोलापी ओडिशा के कालाहांडी जिले के नुनपुर पंचायत के सुदूर जंबाहली गांव की रहने वाली हैं। यूनिसेफ इंडिया के मुताबिक, गोलापी को कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। उनके पति का नाम वशिष्ठ राना हैं। गोलापी के दो बच्चे है, एक 15 साल की बेटी और 6 साल का बेटा है। 35 साल की गोलापी जब तीसरी बार गर्भवती हुई तो उन्होंने ग्राम स्वास्थ्य कार्यकर्ता के निर्देशों का पालन करते हुए नियमित तौर पर प्रसव पूर्व जांच कराईं। इस दौरान सहायक नर्स और मिडवाइफ ने उनकी गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की पहचान अधिक जोखिम की स्थिति के तौर पर की।

गर्भावस्था में जोखिम

गर्भावस्था में जोखिम होने की स्थिति पता चलने पर उन्हें जांच के लिए गांव से 30 किलोमीटर दूर तुसरा में निकटतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया गया। परिवार के लोग उन्हें जिला मुख्यालय अस्पताल बोलंगीर ले गए। यहां उन्हें उच्च रक्तचाप की दवाएं दी गईं। अल्ट्रासाउंड से पता चला कि बच्चा ठीक है और उसका वजन लगभग 3.2 किलोग्राम था। अस्पताल से चार दिन बार गोलापी घर लौट आईं।

मृत बच्चे का जन्म

हालांकि एक सप्ताह बाद गोलापी को महसूस हुआ कि बच्चा गर्भ में हलचल नहीं कर रहा। उन्होंने अस्पताल जाने का निर्णय किया लेकिन भाड़े पर वाहन तलाशने में दो घंटे से ज्यादा समय लग गया। वहीं तुसरा में समुदाय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने में भी एक घंटे का वक्त लगा। वहां से डॉक्टरों ने गोलापी को जिला मुख्यालय अस्पताल बोलंगीर रेफर कर दिया। यहां उनका सिजेरियन सेक्शन किया गया। गोलापी ने एक मृत बच्चे को जन्म दिया।

बच्चे की मौत का कारण

प्रसव के दौरान मृत बच्चे की मौत की कई वजहें थीं। गोलापी का उच्च रक्तचाप एक वजह हो सकता है। दूसरा वजह अस्पताल देरी से पहुंचना भी हो सकता है। लेकिन गोलापी 30 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक कितना जल्दी पहुंचती, वह भी तब जब सड़क की स्थिति खराब है। सामाजिक तौर पर मृत शिशु के जन्म का कारण किशोरावस्था में गर्भधारण करना हो सकता है।

गोलापी ने लिया फैसला

अपना बच्चा खोने के बाद गोलापी पर दुखों का पहाड़ टूट गया। उन्हें समय लगा खुद को संभालने में। लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने जीवन का एक बड़ा फैसला लिया। गोलापी ने तय किया कि उनका परिवार दो बच्चों तक ही सीमित रहेगा और उन्हें अधिक बच्चे नहीं चाहिए। उन्होने नसबंदी करा ली।

यूनिसेफ लगातार महिलाओं और शिशु के स्वास्थ्य लाभ पर कार्य कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं और सामुदायिक स्तर पर मातृ और नवजात सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार व नागरिक समाज संगठनों के साथ यूनिसेफ सक्रिय रूप से कार्यरत है। यूनिसेफ का काम प्रशिक्षण, निगरानी और स्वास्थ्य कर्मचारियों के परामर्श व केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों और जनजातीय आबादी को लक्षित करते हुए उनके लिए काम करना है।
 
3 वर्ष पहले

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