दुनिया में कहीं न कहीं
कुछ न कुछ ऐसा घट रहा है
जो वक़्त-बेवक्त पहुँच ही जाएगा यहाँ तक।
सर्द हवाएं चली आएंगी बसंत के फूलों को बर्बाद करने
या शायद गर्मी उन्हें झुलसाने आ जाए।
बिना कागजात, बिना पासपोर्ट आ जाएगा कोई वायरस
और धर दबोचेगा मुझे
जब मैं मिला रही होऊंगी किसी से हाथ
या चूम रही होऊंगी कोई गाल
कहीं न कहीं शुरू हो चुका है कोई छोटा सा झगड़ा
कुछ तीखे और कड़वे शब्दों ने
लगा दी है आग
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